Written by ... Raj Luv . Prashant.
मैं रहता हूं किस गम में,
बस यही एक सोच सी रहती है,,
थंम सी जाती है मुझ तक आते आते,
शायद खुशियो के पांव में कोई मोंच सी रहती है,,
बड़ी शिद्दत से उठाता हूँ कोई कागज दो लफ्ज़ लिखने को,
पर लिख नहीं पाता लगता है ये कलम बेहोश सी रहती है,,
दर्द बेइंतहा है पर बयां करने का जरिया नहीं,
चींखें चिंख्ती है अंदर ही अंदर पर बहार ये भी खामोश सी रहती है।।
राज ।।

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