Sunday, 26 March 2017

Nasha

WRITTEN BY...Raj Prashant.

मेरी मदहोशी को सब लोग नशे का रोग कहते है,
मगर वो जानते नहीं क्यों हम बेहोश रहते है,,

नशा ये ज़िन्दगी का है, हमें जीने की है आदत,
हैं बचपन से खुमारी में इसे हम शोंक कहते हैं।।
BY.. Raj Luv..

Monday, 20 March 2017

Zara sa kuch

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ
हर वक़्त मेरे साथ है उलझा हुआ सा कुछ,

होता है यूँ भी रास्ता खुलता नहीं कहीं जंगल-सा फैल जाता है खोया हुआ सा कुछ ,

साहिल की गिली रेत पर बच्चों के खेल-सा
हर लम्हा मुझ में बनता बिखरता हुआ सा कुछ ,

फ़ुर्सत ने आज घर को सजाया कुछ इस तरह
हर शय से मुस्कुराता है रोता हुआ सा कुछ ,

धुँधली सी एक याद किसी क़ब्र का दिया
और मेरे आस-पास चमकता हुआ सा कुछ....।।

Sunday, 19 March 2017

Yahi soch si rahti hai. By Raj.


Written by ... Raj Luv . Prashant.
मैं रहता हूं किस  गम में,
बस यही एक सोच सी रहती है,,

थंम सी जाती है मुझ तक आते आते,
शायद खुशियो के पांव में कोई मोंच सी रहती है,,

बड़ी शिद्दत से उठाता हूँ कोई कागज दो लफ्ज़ लिखने को,
पर लिख नहीं पाता लगता है ये कलम बेहोश सी रहती है,,

दर्द बेइंतहा है पर बयां करने का जरिया नहीं,
चींखें चिंख्ती है अंदर ही अंदर पर बहार ये भी खामोश सी रहती है।।
राज ।।