मोम का जिस्म लेकर कैसे आऊं मैं तेरे पास,
की आग होंठो से उगलते है तेरी गली के लोग,,
मैं तो एक पत्ता हूँ मेरी औकात ही क्या है,
फूल पैरों से मसलते है तेरी गली के लोग।।
की आग होंठो से उगलते है तेरी गली के लोग,,
मैं तो एक पत्ता हूँ मेरी औकात ही क्या है,
फूल पैरों से मसलते है तेरी गली के लोग।।



